No Cost EMI से फायदा या नुकसान, क्या करनी चाहिए आपको 0% EMI ऑफर पर खरीददारी

No Cost EMI - kya sach mein no cost hain

No Cost EMI यानी कि बिना किसी ब्याज के आसान किस्तों में सामान खरीदने की सुविधा!

आज के समय में No Cost EMI इतनी पोपुलर हो चुकी है की हर कोई नो कोस्ट पर ही सामान खरीदन पसंद करता हैं। ऑफलाइन स्टोर्स हो या अमेज़ॉन और फ्लिपकार्ट जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स – सभी पर No Cost EMI या Zero कोस्ट EMI का ऑप्शन आसानी से मिल जाता है। लेकिन सवाल उठता है कि क्या No Cost EMI वास्तव में No Cost होती है या फिर इसके पीछे भी कोई कहानी छुपी हुई हैं?

No Cost EMI क्या है?

जब आप किसी प्रोडक्ट को No Cost EMI पर खरीदते हैं तो अक्सर यह कहा जाता है कि आपको कोई ब्याज नहीं देना पड़ेगा।

उदाहरण के लिए एक आइटम की कीमत ₹10000 है और आपको यह 6 महीने की EMI पर बिना किसी ब्याज के ₹1667 प्रति माह EMI पर मिलता हैं। इसे देखकर आपको लगता है की एक अच्छी डील मिल रही है क्योंकि इस तरह से वो बिना किस एक्स्ट्रा भुगतान के सामान को आसान किस्तों में खरीद सकता है।

  • Item Cost: ₹10,000
  • Duration: 6 months
  • No additional charges or interest
Item CostMonthsEMIInterest
₹10,0006₹1,666.67₹0.00

क्या No Cost EMI सच में No Cost है?

RBI के नियमो के अनुसार, वास्तव में No Cost EMI में कुछ न कुछ ब्याज या एक्सट्रा चार्जेज छुपे होते हैं।

उदाहरण के लिए अगर आप किसी प्रोडक्ट को ऑफलाइन ₹9000 में खरीद सकते हैं पर वही चीज ऑनलाइन No Cost EMI के जरिये ₹10000 में खरीद रहे हैं तो यह साफ़ हो जाता है कि कहीं न कहीं एक्सट्रा कॉस्ट आपको वहन करनी पड़ रही है और वही से मालूम चलता है की No Cost EMI सच में नो कोस्ट नहीं हैं।

वही अगर दोनों जगहों पर उस प्रोडक्ट की कीमत समान होती है तो फिर नो कोस्ट EMI सच में नो कोस्ट होती हैं।

कई बार प्रोडक्ट की कीमत में ब्याज को शामिल कर दिया जाता है या फिर प्रोसेसिंग फीस को जोड़ दिया जाता हैं वो भी 10 से 15 प्रतिशत तक। इसलिए खरीदारी करने से पहले प्रोडक्ट की असली कीमत, ऑफर्स और प्रोसेसिंग फीस के बारे में अच्छी तरह से जानना और तुलना करना ज़रूरी है।

कैसे काम करती है No Cost EMI?

नो कोस्ट EMI वाले ऑप्शन में रिटेलर और ऑनलाइन प्लेटफार्म के साथ बैंक भी इस प्रक्रिया में शामिल होते हैं जो रिटेलर्स या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के साथ डील कर ग्राहक को No Cost EMI का ऑप्शन देते हैं। इस तरह रिटेलर या ऑनलाइन प्लेटफार्म या तो पहले से ही प्रोडक्ट की कीमत में इंटरेस्ट को जोड़ देते है या फिर खुद बैंक को उस ब्याज का भुगतान करते हैं।

इस प्रकार का ऑप्शन मिलने पर लोग ज्यादा से ज्यादा खरीददारी करते हैं और प्रोडक्ट की सेल क्वांटिटी दो से तीन गुना तक बढ़ जाती हैं और रिटेलर और प्लेटफार्म को Per Piece मुनाफा कम होने के बावजूद भी बड़ा फायदा होता हैं – इस तरह से बैंक और प्लेटफार्म – दोनों को फायदा होता है वही ग्राहक को एक महंगा आइटम किस्तों में वो भी बिना ब्याज के मिला जाता है।

No Cost EMI के फायदे और नुकसान

No Cost EMI का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यदि आपके पास एक साथ पूरा पैसा नहीं है तो आप बिना किसी एक्सट्रा चार्ज के सामान खरीद सकते हैं। कभी-कभी No Cost EMI के ऑफर्स में प्रोडक्ट की असली कीमत को बढ़ा कर दिखाया जाता है। कुछ बैंक 6 महीने के बाद ब्याज लगाना शुरू कर देते हैं जो शुरुआत में बताया नहीं जाता – इस बात का भी ध्यान रखना आवश्यक हैं।

लेकिन फिर भी महंगे प्रोडक्ट्स को No Cost EMI से आसानी से खरीदने की सुविधा मिलती है। सामान की कीमत एक साथ नहीं चुकानी नहीं पड़ती है। पर कभी-कभी छुपे हुए चार्जेज और फीस से प्रोडक्ट महंगा भी पड़ सकता है।

No Cost EMI पर खरीददारी करते समय क्या ध्यान रखें?

  • हमेशा ऑफर्स और शर्तों को ध्यान से पढ़ें।
  • प्रोडक्ट की असली कीमत का पता लगाएं और ऑफलाइन स्टोर्स में भी कीमतों को चेक करें।
  • EMI ऑप्शन्स को अच्छे से समझें – ब्याज दर और प्रोसेसिंग फीस के बारे में।

No Cost EMI एक ऑप्शन हो सकता है अगर आप सावधानी से इसका चयन करते हैं। हमेशा समझदारी से निर्णय लें और किसी भी तरह की जल्दबाज़ी से बचें। ताकि सच में No Cost EMI के ऑफर्स का आप फायदा उठा सके।

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